गोमुखासन : योगाभ्यास - UPS PURVA ,MALIHABAD, LUCKNOW

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शनिवार, 19 सितंबर 2020

गोमुखासन : योगाभ्यास

 योग संदेश



गोमुख का अर्थ होता है: गाय का मुख

गोमुखासन मुख अर्थात अपने शरीर को गोमुख के समान बना लेने के कारण ही इस आसन को गोमुखासन कहा जाता है।

गोमुखासन की विधिo -

चरण 1

सबसे पहले आप जमीन पर बैठ जाएं। अब आप दोनों पैरों को सामने फैलाएं। पीठ को सीधा रखें।

चरण 2

बायें पैर की एड़ी को दाहिने कूल्हे (नितम्ब) के समीप और दाहिने पैर की एड़ी को बायीं जांघ के ऊपर रखते हुए बायें कूल्हे के समीप रखें। घुटने एक दूसरे के ऊपर रहें।

चरण 3

दाहिने हाथ को ऊपर से मोड़ते हुए पीठ पर तथा बायें हाथ को नीचे से । गोमुखासनसेलाभर मोडकर पीठ पर ले जाएं। दोनो हाथों को परस्पर फंसा लें।

चरण 4

धड़ सीधा तथा आँखों को बंद रखिए मन को दोनों भू के बीच भूमध्य भाग पर एकाग्र करिए

इस आसन को आरंभ में तीन तीन बार किया जाना चाहिए


लाभ -

  1. इस अभ्याससे भुजाएंमजबूत होती हैं।
  2. इसआसनसे पीठदर्द ठीकहोता है।
  3. पाचनतंत्रकीसक्रियता बढ़ती है।
  4. वृक्कों(किडनी)में सक्रियता बढ़ती है
  5. यह आसनबच्चों के मन को एकाग्र करके चंचलता को दूर करता है।
  6. इस आसन का अभ्यास करने से बच्चों के चेहरे पर तेज आता है, कमजोरी दूर होती

  • सावधानी
  • 'यह हमेशा ध्यान रखें, किसी भी आसन को करने से पहले योग विशेषज्ञ की राय और सहयोग अवश्य लें।

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